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Ashfaque ahmed


HEALTH
|
3 MIN READ

रोगों का इलाज दवा में नहीं भोजन में होना चाहिए?

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ashfaquewriter
a month ago
a month ago
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हम क्या खाएं, क्या नहीं खाएं, स्वस्थ रहने के लिए क्या करें? इस पर विचार नहीं करते. हम तो केवल कमाने खाने और मौज मस्ती पर ही ध्यान देते हैं. शरीर की चिंता डॉक्टर करे. इसी का परिणाम है कि हमारे मन का ध्यान शरीर पर केवल तब जाता है जब हमें पीड़ा या असुविधा का आभास होता है, अन्यथा नहीं. हमें इतना सोचना ही चाहिए कि जो आदमी अपने शरीर का ही सगा नहीं रहता वह दूसरों का सगा कैसे हो सकता है.

इसलिए आज हमें स्वार्थी भी नहीं रहे, केवल प्रार्थी बन कर रह गए हैं.



पुराने ज़माने में एक कहावत हुआ करती थी, “मरे बिना स्वर्ग नहीं मिलता” शायद इसीलिए हम धरती पर रहकर ही साक्षात् नर्क भोग रहे हैं.

 

चिकित्सा विज्ञान शरीर को वसा, विटामिन, प्रोटीन, हार्मोंस, कार्बोहाइड्रेट, खनिज पदार्थ या धातु आदि की द्रष्टि से देखता है. आये दिन समाचार छपता रहता है कि अमुक विटामिन या प्रोटीन से अमुक रोग में लाभ होता है.

जीवन भवान क सवोत्तम भेंट है और निरोग रहना सबसे बड़ा वरदान, निरोग रहने के लिए आवश्यक है, पोषक भोजन. हम स्वस्थ रहने के लिए कब क्या खाएं, जिससे भोजन से न केवल उदरपूर्ति ही हो, बल्कि दवा की तरह प्रभाव डालता हुआ वह हमें सवस्थ रखे. आज हमें इस ज्ञान की आवशकता है.


 

भोजन स्वस्थ जीवन व्यतीत करने का आधार है. खाया जाने वाला भोजन यदि रूचिकर हो एवं पच जाये तो हम सवस्थ रहेंगे. स्वास्थ्य रक्षक आदर्श भोजन के लिए आधुनिक विज्ञान के अनेक चार्ट मिलते हैं, जिनमें कैलोरीज के हिसाब से नित्य कितनी मात्रा में कार्बोज, प्रोटीन, विटामिन आदि अलग अलग खाद्य पदार्थों की मात्रा दी हुई होती है.

परन्तु पाचक ठीक न होने से उतनी कैलोरीज हमें तत्व रूप में नहीं मिलती. जितनी हम खा जाते हैं. परिणाम यह होता है कि हम बीमार पड़ जाते हैं. अत: भोजन पर विशेष ध्यान देकर वो खाद्य सही ढंग से खाना चाहिए, जो शरीर को पोषक करते हुए, रोमुक्त करने में दवा की तरह क्रिया करे.

 

रोग का इलाज चिकित्सालय की अपेक्षा भोजनालय में होना चाहिए. हमारे दैनिक जीवन में मतप्राय भोजन लेते हैं.    

यदि हम भोजन में सुधार और सयंमपूर्ण जीन व्यतीत करते रहें तो शतायु होने से कोई रोग नहीं सकता.

गीता में कहा भी है कि सात्विक आहार और आवश्यकता से कम खाने से आयु बढ़ती है. पेट को अन्न से खाली रखो, ताकि उसमें भगवान का दर्शन कर सकें. खान पान कितना हो स्वादिष्ट हो जो भी खाएं भली प्रकार चबा चबा कर खाएं आदमी अधिक खाकर जल्दी मरता है, कम खा कर नहीं. खाइए कम, पचाइए ज्यादा सदा हंसमुख रहिये, परहेज या पथ्य ठीक न होने पर दवा कोई प्रभाव नहीं कर सकती. स्वास्थ्य, सौंदर्य आवश्यकतानुसार भिजन अच्छा रहता है, आपकी जीवनचर्या जितनी प्रक्रतिके निकट होगी आप उतने ही स्वस्थ एवं चिरायु होंगे.


 

यदि भोजन शुद्ध है तो सात्विकता आती है. सात्विकता से अटल स्मरण शक्ति बढ़ती है.और स्मरण शक्ति से ज्ञान की प्राप्ति होती है. ज्ञान से दिल की गाँठ खुल जाती है अर्थात अज्ञान नष्ट होकर सभी शंकाओं का समाधान होता है. इस प्रकार शुद्ध भोजन के सेवन से सब प्रकार से कल्याण होता है.

मनुष्य के लिए सबसे उपयोगी भोजन वह है जो या तो अपनी प्राक्रतिक अवस्था और स्वरूप हो में या अवशता और स्वरूप में कम से कम परिवर्तन हुआ हो. अंत में मैं यही कहना चाहता हूँ, "अच्छा खाएं और स्वस्थ रहें".

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